राजस्थानी भाषा की तरह ही राजस्थानी सिनेमा भी सरकारी सहयोग के अकाल से पीड़ित है। दोनों ही सरकार की बेरुखी के शिकार है। राजस्थानी सिनेमा के जाने माने निर्देशक नीरज खंडेलवाल द्वारा निर्देशित राजस्थानी फिल्म मिंजर के निर्माण और उसकी रिलीजिंग की कहानी सरकार की राजस्थानी सिनेमा के साथ अनदेखी को बयान करती है।
लेकिन ओटीटी प्लेटफार्म स्टेज के साथ की वजह से आखिर रेगिस्तान में खेजड़ी पर खिले सुहावने फूल की तरह ही फिल्म मिंजर ने अपनी सुखद मंजिल हासिल की। तीन साल प्रतीक्षा के बाद 18 जुलाई को फिल्म मिंजर का राजस्थानी सिनेमा प्रेमियों को ओटीटी प्लेटफार्म स्टेज पर दीदार हुआ। 18 जुलाई को धूमधड़ाके के साथ स्टेज ने फिल्म मिंजर को राजस्थानी सिनेमा प्रेमियों को प्रस्तुत किया।
चर्चित रही राजस्थानी फिल्म मुकलावो के निर्देशक नीरज खंडेलवाल ने फिल्म मिंजर का निर्देशन किया है। फिल्म की पटकथा, शूटिंग, भाषा और पहनावे में राजस्थान की मौलिकता का बखूबी से प्रदर्शन किया गया। एक फौजी के आसपास घूमती फिल्म मिंजर में ठेठ राजस्थानी माहौल को दर्शक महसूस कर सकते है जो आजकल राजस्थानी सिनेमा में भी पीछे छुटते जा रहे है।
फिल्म में राजस्थान के परंपरागत लोकप्रिय गाने ‘म्हाने चुनडी मंगा दे ओ ननदी के बीरा’ को आधुनिक अंदाज में रिकॉर्ड और शूट किया गया। फिल्म के इस शाइनिंग गाने को स्टेज ने स्टेज म्यूजिक राजस्थानी पर अलग से रिलीज किया। नीरज खंडेलवाल निर्देशित राजस्थानी फिल्म मिंजर के गाने हनुमान सिंह रत्नु और कैमी राजपूत ने लिखे जिन्हें अनील डूडी ने संगीत दिया। दिलबर हुसैन, दीप्ति चित्तौड़ियां, दानिश सिहोल, जसप्रीत कौर और अनील डूडी ने अपनी मधुर राजस्थानी लहजे में आवाज दी।
राजस्थानी सिनेमा के जाने माने चेहरे दीपक मीना उर्फ पन्या सेपट, पी एम डूडी, प्रिया राजपूत, अल्ताफ खान, पलक सक्सेना, हर्षित माथुर, राजेश खन्ना, रॉकी, राशि शर्मा, पिंटू राणावत ने फिल्म मिंजर में उम्दा अभिनय किया।
निर्देशक नीरज खंडेलवाल ने शाइनिंग टाइम्स को बताया कि राजस्थानी सिनेमा के लिए सबसे बड़ी चुनौती है उनका सिनेमा के पर्दे पर प्रदर्शित होना। फिल्म मिंजर इसका जीवंत उदाहरण है। नीरज खंडेलवाल ने कहा कि बड़ी मुश्किल से राजस्थानी फिल्म निर्माता और निर्देशक फिल्म निर्माण का पैसा जुटा कर फिल्म का निर्माण तो कर लेते है। लेकिन प्रदर्शन के लिए उसके पास ना तो बजट बचता है ना ही सिनेमी हॉल वाले उन्हें प्रदर्शन के लिए साथ देते है।
नीरज खंडेलवाल ने जानकारी दी कि फिल्म मिंजर का निर्माण 2022 में ही हो गया था लेकिन सिनेमा हॉल में प्रदर्शन के लिए बजट नहीं जुटा पाने से तीन साल का इंतजार किया। इस बीच उन्होंने कई राष्ट्रीय स्तर के यूट्यूब प्लेटफार्मस से सम्पर्क कर इसे यूट्यूब पर रिलीज कराने की कोशिश की लेकिन फिल्म का सही आंकलन नहीं होने और उचित प्लेटफार्म नहीं मिलने से रिलीजिंग में इतनी देरी हुई।
आखिर इसे भारतीय दर्शकों खासकर राजस्थानी सिनेमा प्रेमियों के बीच लोकप्रिय ओटीटी प्लेटफार्म स्टेज ने प्रस्तुत किया।प्रदर्शन के अपने निर्धारित मानकों पर खरी उतरने के बाद स्टेज ने घोषणा की थी कि वो फिल्म मिंजर को अपने प्लेटफार्म पर खुद के ओरिजनल कंटेंट की तरह इसे भव्य तरीके से रिलीज करेगा।
अच्छे मौसम का संकेत देने वाले मिंजर यानी खेजड़े के फूल की तरह राजस्थानी फिल्म मिंजर भी राजस्थानी सिनेमा के लिए सरकारी सहयोग और दर्शकों के प्यार का माध्यम बनेगी ऐसी राजस्थानी सिनेमाप्रेमी अपेक्षा करते है।