उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ के नजदीक स्थित डॉक्टर अम्बेडकर सर्किल का नाम राजपत्र में पोलो सर्किल प्रकाशित होने का मामला तुल पकड़ता जा रहा है। अम्बेडकर विचारधारा से प्रेरित प्रमुख संगठन डॉक्टर अम्बेडकर विचार मंच इसे षडयंत्र के रूप में देखता है।
डॉक्टर अम्बेडकर विचार मंच के जयपुर जिलाध्यक्ष महता राम काला ने शाइनिंग अम्बेडकर टाइम्स को बताया कि पोलो सर्किल का नाम कभी भी अस्तित्व में नहीं रहा ऐसे में नाम चुराने के किसी षडयंत्र से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि जिन यातायात पुलिस उपायुक्त सुमित मेहरड़ा का हस्ताक्षर से यह आदेश जारी हुआ है वो स्वयं अनुसूचित जाति से आते है और अंबेडकर विचारों से प्रेरित रहे है। ऐसे में वो स्वयं ऐसी गलती नहीं कर सकते है। महता राम ने आशंका जताई कि यह भी हो सकता है कि उनके खिलाफ षडयंत्र के तहत उनके हस्ताक्षर से यह विवादित आदेश निकाला गया है।
डॉक्टर अम्बेडकर विचार मंच ने पुलिस अधिकारी सुमित मेहरड़ा को ज्ञापन देकर मामले की गहराई से जांच कराने की मांग की है। महता राम काला ने बताया कि डॉक्टर अंबेडकर सर्किल के पास धनिक और प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारियों का पोलो क्लब है। शायद इन प्रभावशाली लोगों ने अपने क्लब को और लोकप्रिय करने के लिए सोच समझ कर सर्किल का नाम पोलो सर्किल कर देखो और परखो का प्रयास किया हो।
जिलाध्यक्ष महता राम काला ने बताया कि वे सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जयपुर नगर निगम से डॉक्टर अंबेडकर सर्किल के अधिकृत नामकरण के आदेश की प्रति मांगेंगे।