डॉक्टर अंबेडकर सर्किल का नाम बदलने से जुड़े आदेश से हुआ बवाल। प्रशासन ने किया रोल बैक। ‘छेड़ो और परखो’ की आशंका बढ़ी। डॉ. अंबेडकर विचार मंच हुआ सक्रिय।
राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर खंडपीठ परिसर में स्थापित मनुमूर्ति का विवाद अभी अनसुलझा है। इसी बीच खंडपीठ के नजदीक अम्बेडकर सर्किल एक बार फिर चर्चा में आ गया। चर्चा की वजह बना यातायात पुलिस उपायुक्त सुमित मेहरड़ा की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन जिसमें स्टेच्यु सर्किल से विधानसभा तिराहे तक सड़क को नो पार्किंग जोन घोषित किया गया।
गजट नोटिफिकेशन में अंबेडकर सर्किल को पोलो सर्किल नाम से उल्लेखित किया गया। विपक्षी कांग्रेस के राजस्थान अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुद्दे को लपकते हुए टिप्पणी की कि क्या भाजपा सरकार ने अम्बेडकर सर्किल का नाम चुपचाप बदलकर पोलो सर्किल कर दिया है।
उन्होंने कहा कि राजस्थान राजपत्र जैसे आधिकारिक दस्तावेज में काल्पनिक नाम डालने का दुस्साहस कैसे हुआ। डोटासर ने कहा कि यह अम्बेडकर जी जैसे महापुरुष के नाम को मिटाने का षड्यंत्र और भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। क्या भाजपा को बाबा साहेब जी से इतनी नफरत और असहजता है कि उनके नाम वाले सर्किल को भी कागजों से मिटाया जा रहा है।
मामले के राजनीतिक तूल पकड़ने के साथ ही पुलिस महकमा हरकत में आया और आनन फानन में राजपत्र में संशोधित आदेश जारी किया गया। संशोधित आदेश में कहा गया कि पोलो सर्किल को अम्बेडकर सर्किल पढ़ा जाए। डॉक्टर अम्बेडकर विचार मंच के जयपुर अध्यक्ष महता राम काला ने इसे टाइपिंग एरर बताकर कर प्रशासन को माफ कर दिया। अलबत्ता महता राम ने आपत्ति की कि अंबेडकर सर्किल को पोलो सर्किल लिखना ही नहीं चाहिए था। इसी बीच लोगों को आशंका है कि कही यह सरकार की छेड़ो और परखो की रणनीति तो नहीं।