वामपंथी पार्टियों के राष्ट्रीय आह्वान के तहत जयपुर के खासा कोठी चौराहे पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया। केंद्र की भाजपा-आरएसएस की मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किये बदलावों को इस रोज़गार गारंटी कानून को खत्म किए जाने की साज़िश के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शन के पश्चात ख़ासा कोठी चौराहे पर नये बिल की प्रतियां जलाई गई। विरोध-प्रदर्शन के बाद आयोजित की गई सभा को सम्बोधित करते हुये वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार द्वारा मनरेगा क़ानून में किये गये बदलावों द्वारा देश के किसान-मज़दूरों, नौजवानों और ग्रामीण गरीबों पर सीधा कुठाराघात किया गया है। देश के मेहनतकश जनता द्वारा लम्बे संघर्षों और कुर्बानियों के बाद हासिल किये गये रोज़गार के इस संवैधानिक अधिकार को कमजोर करते हुये इसे खत्म करने की साज़िश की जा रही है। नया कानून मनरेगा से मिली रोज़गार की गारंटी को समाप्त करता है।
मनरेगा के लिए जहां 90 प्रतिशत फंड केंद्र सरकार की ओर से दिया जाता था वहीं अब नए कानून के तहत केंद्र सरकार केवल 60 प्रतिशत फंड देगी और राज्य को योजना के लिए 40 प्रतिशत फंड का भार उठाना पड़ेगा। क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा तमाम संसाधनों के अधिकाधिक किये जा रहे केंद्रीकरण के चलते तमाम राज्य सरकारें पहले ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही हैं , खासतौर पर विपक्षी दलों द्वारा शासित प्रदेश सरकारों को भाजपा-आरएसएस की केंद्र सरकार द्वारा फंड को लेकर ब्लैकमेलिंग का शिकार होना पड़ रहा है।
केंद्र के संविधान विरोधी इस रवैए के चलते पहले से आर्थिक संकटों का सामना कर रही राज्य सरकारों के लिये फंड जुटा असंभव हो जायेगा, जिससे नए कानून के तहत मज़दूरों को रोज़गार मिलना असम्भव हो जाएगा।
वक्ताओं ने आंकड़ों के साथ बताया कि मनरेगा के बजट में केंद्र सरकार ने लगातार कटौती करने का काम किया है और कभी भी कानून द्वारा निर्धारित 100 दिन रोज़गार की बात तो दूर मनरेगा में 50 दिन भी मुश्किल से रोज़गार मिल पा रहा है। अब इस परिवर्तन से तो मज़दूरों को कुछ दिन रोज़गार मिलना मुश्किल हो जाएगा। यह कानून मोदी सरकार का घोर मज़दूर विरोधी चरित्र दिखाता है, जो कि मज़दूरों को बड़े ज़मींदारों और ग्रामीण नवधनाढ्य वर्गों का गुलाम बनाना चाहती है।
इस ज़ुल्म के ख़िलाफ़ देश का मज़दूर, किसान और बेरोज़गार नौजवान एकताबद्ध होकर लड़ेगा और केन्द्र सरकार को इस कानून को वापस लेने को मजबूर करेगा। विरोध प्रदर्शन के दौरान मोदी सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए। आमसभा को सीपीआई(एम) के जिला सचिव और राज्य सचिव मंडल सदस्य डॉ.संजय”माधव” , सुमित्रा चोपड़ा, सीपीआई के नेता कुणाल रावत, डीके छंगाणी और सीपीआई (एमएल) की जिला सचिव मंजूलता ने सम्बोधित किया।