राजस्थान के इतिहास में घुमंतु समुदाय की महती भूमिका रही है। लेकिन लोकतंत्र व्यवस्था में इस समुदाय की सहभागिता अभी तक हाशिए पर रही है। अस्थाई आवास के इस समुदाय के स्वरूप के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ पाना घुमंतु समुदाय के लिए चुनौती बना रहता है। साथ ही पहचान के दस्तावेजों की कमी से यह समुदाय विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एस आई आर और नागरिकता के दस्तावेजों से भी वंचित रह जाता है।
करीब 7 फीसदी जनसंख्या के रूप में राजस्थान में रह रहे 70 लाख विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध घुमंतु यानी डी एन टी लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जोड़ने के लिए राजस्थान सरकार 12 से 31 जनवरी तक विशेष शिविर लगा रही है। इन शिविरों में डी एन टी समुदाय के लोगों के मतदान पहचान पत्र, आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज भी बनाए जाएंगे। अभियान में चयनित ई मित्र केंद्रों की भी बड़ी भूमिका रहेगी।
शाइनिंग टाइम्स न्यूज मीडिया ने सरकार के इस अभियान की प्रासंगिकता को जानने के लिए विमुक्त, घुमंतु और अर्द्ध घुमंतु जाति कल्याण बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और निवर्तमान राज्यमंत्री गोपाल केसावत से चर्चा की। कांग्रेस नेता गोपाल केसावत ने सरकार के इस अभियान की सराहना की लेकिन उन्होंने मांग की कि अभियान की सफलता के लिए डी एन टी समुदाय के प्रभावी संगठनों और नेताओं को भी अभियान के साथ सरकार अधिकृत रूप से जोड़े। उन्होंने बताया कि इसके लिए वे मुख्यमंत्री भजनलाल को ज्ञापन देंगे।
ट्रस्ट के माध्यम से डी एन टी समुदाय के कल्याण की योजना बना रहे गोपाल केसावत ने शाइनिंग टाइम्स को बताया कि चुनाव आयोग के एस आई आर अभियान में दस्तावेजों की कमी से डी एन टी समुदाय का बड़ा हिस्सा मतदाता सूची से बाहर हो गया है। दस्तावेजों के अभाव में अब जनगणना से भी समुदाय के कई लोग बाहर हो जाएंगे। उन्हें डर है कि दस्तावेजों की कमी से देश के डिटेंशन कैंपों में सबसे ज्यादा डी एन टी समुदाय के लोग हो सकते है। इसलिए केसावत ने मांग की है कि समाजनेताओं को अधिकृत रूप से जोड़ कर राज्य सरकार के इस अभियान को गंभीरता से उपयोगी बनाया जाना चाहिए।