
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के प्रतिनिधिमंडल ने चौमूं के मज़्जिद के बाहर और उसके बाद समुदाय विशेष के लोगों पर पुलिस कार्यवाही को दमनकारी बताते हुए पुलिस कार्यवाही से पीड़ित हुये पठानों का मौहल्ला, कुम्हारों का मौहल्ला, लुहारों का मौहल्ला और अन्य प्रभावित इलाकों का दौरा किया।
प्रतिनिधि मंडल में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M) के पोलित ब्यूरो सदस्य सांसद कॉमरेड अमराराम, CPI(M) के जयपूर जिला सचिव और राज्य सचिव मंडल सदस्य डॉ.संजय “माधव”, राज्य सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड सुमित्रा चोपड़ा, भारत की जनवादी नौजवान सभा के जयपुर जिला अध्यक्ष मोहसिन पठान, जिला सचिव ऋतांश आजाद, जिला उपाध्यक्ष मनीष कुमार, किसान सभा से हरिशंकर मंडिया और अन्य स्थानीय नेता शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने चौमूं के प्रभावित इलाकों का दौरा करके पुलिस कार्यवाही के शिकार पीड़ितों से मुलाकात कर उन्हें ढ़ाढस बढ़ाया और इस घटना के दोषियों को दंडित करने के लिये हरसंभव कदम उठाने का यकीन दिलाया। प्रतिनिधिमंडल ने आमजनों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा किये गए व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की और मुख्यमंत्री भजन लाल और राज्य सरकार से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने की मांग की। साथ ही पुलिस कार्यवाही से हुये घायलों की निःशुल्क चिकित्सा और समुचित इलाज की मांग की।
संगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाते हुए कहां कि पुलिसकर्मियों द्वारा की गई भारी तोड़फोड़ और नुकसान की भरपाई के लिये मुआवजा दिया जाएं। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी, राजस्थान ने राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुये आगाह किया है कि राज्य के अल्पसंख्यकों और वंचित तबकों को डराने-धमकाने की कोशिशों से बाज़ आये। उन्होंने कहां कि राजस्थान के तमाम धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और संविधान में विश्वास रखने वाले लोग चौमूं और राज्य के अल्पसंख्यकों के साथ हैं। किसी को भी और किसी भी सूरत में राज्य के साम्प्रदायिक सद्भाव, भाईचारा और सौहार्द की विरासत को खत्म करने की साज़िश रचने की इजाजत नहीं दी जायेगी। राजस्थान की तमाम जनता एकजुट होकर ऐसी सभी ताकतों का मुकाबला करेगी। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस द्वारा धरपकड़ करके फैलायी जा रही दहशत की कार्यवाही को तुरंत बंद करने और गिरफ्तार किए गए निर्दोष लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग भी की है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहां कि आम जनता और तमाम संबंधित पक्षों से हासिल की गई जानकारी के अनुसार चौमूं में बस स्टैंड के पास स्थित एक मस्ज़िद को लेकर किये गये अनावश्यक हस्तक्षेप से पूरा विवाद पैदा किया गया है। पिछले लगभग 45 सालों से यह प्रकरण राजस्थान हाई कोर्ट में विचाराधीन चल रहा है और लम्बे समय से माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इस पर यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया हुआ है। बिना न्यायालय की विधिवत अनुमति लिये स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा कुछ चुनिंदा लोगों के साथ मिलकर मस्जिद की यथास्थिति को बदलने का प्रयास किया। जिसके तहत मस्जिद के बाहर लगे हुये पत्थरों को हटाकर रैलिंग लगाने की बात स्थानीय चौमूं थानाधिकारी ने कही और स्वत: ही अल्पसंख्यक के कुछ चुनिंदा लोगों को साथ लेकर पुलिस की मौजूदगी में पत्थरों को हटाकर वहां लोहे की रैलिंग लगा भी दी गई। तत्पश्चात किन्हीं कारणों से पुलिस के द्वारा ही पहले रैलिंग को थोड़ा पीछे करने और फिर कुछ समय बाद रैलिंग को हटाकर वापस पत्थर रखकर पुनः यथास्थिति बनाने का प्रस्ताव रखा गया। अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधियों ने उस प्रस्ताव को भी स्वीकार करते हुये स्वत: ही रैलिंग को हटाना शुरू भी कर दिया गया। परंतु इसी दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों द्वारा जानबूझकर माहौल को ख़राब किया गया और अनावश्यक हस्तक्षेप कर तनाव पैदा किया गया।










