न्याय का त्वरित होना और नैसर्गिक होना संपूर्ण स्वाधीनता की अनुभूति का मौलिक स्वरूप है। लेकिन जयपुर के हरमाड़ा थाना क्षेत्र के निवासी रामजी लाल रैगर न्याय की फरियाद लेकर दर – दर की ठोकरें खा रहे है। हालात यह हो गई है कि न्याय की आस में उनका जीवन ही खतरे में पड़ गया। वे छुप – छुप कर घर जाने को मजबूर हो गए। रामजी लाल ने शाइनिंग टाइम्स को बताया कि न्याय के लिए ज्योही थाने में दर्खास्त की उल्टे उनके ऊपर झूठे वाद दायर कर गिरफ्तार करने को आमादा है।
फरियादी रामजी लाल रैगर ने शाइनिंग टाइम्स को जानकारी दी कि उनकी खातेदारी की जमीन पर कुछ लोग जबरदस्ती राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित हरे वृक्ष काट रहे है। इसको लेकर उन्होंने स्थानीय हरमाड़ा थाना, पुलिस अधीक्षक, पटवारी, तहसीलदार, एस डी एम, कलेक्टर ही नहीं मुख्यमंत्री कार्यालय को लिखित, ऑनलाइन सहित फोन से कई बार शिकायत की लेकिन न्याय मिलना तो दूर किसी ने एक बार भी सुध नहीं ली। रामजी लाल ने आरोप लगाया कि उन्हें लगता है कि आरोपी से पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने साठ गांठ कर ली है। इसलिए उनकी फरियाद सुनने की बजाय उल्टा उन्हें ही झूठे वाद में फंसाने के प्रयास किए जा रहे है।
पीड़ितों का साथी बनने को संकलित डॉक्टर अंबेडकर विचार मंच समिति को भी फरियादी ने न्याय के लिए गुहार की। समिति के जयपुर जिला अध्यक्ष महता राम काला ने शाइनिंग टाइम्स को कहा कि शासन और प्रशासन की न्याय के लिए फरियाद करने वाले के साथ ऐसी बेरुखी चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगता है इस मामले में प्रशासन के कई अधिकारी आरोपी से ही मिल कर बिक गए है। जिला अध्यक्ष महता राम काला ने जानकारी दी कि उनका संगठन जल्द ही जिला कलेक्टर से मिलकर मामले की वस्तुस्थिति से उन्हें अवगत कराएगा ताकि फरियादी को न्याय मिल सके और उनकी जान माल की हिफाजत हो सके।
गौरतलब है कि फरियादी के खातेदारी की जमीन पर जबरदस्ती घुसकर कब्जा करने की कोशिश करने के अलावा बिना अनुमति राज्यवृक्ष खेजड़ी सहित हरे वृक्ष काटना सोचनीय मामला है। प्रशासन को इस बारे में कई बार सूचित करने के बाद भी ध्यान नहीं देना चिंताजनक स्थिति है। कुछ समय पहले ही राज्य सरकार ने राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित हरे वृक्षों को काटने से बचाने के लिए जन विश्वास संशोधन अधिनयम 2025 के तहत कठोर प्रावधान किए है। इस अधिनियम के तहत राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित हरे वृक्षों को काटने पर 20 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है।