पोलो के शौकीन जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह ने पोलो खेलने के दौरान अपनी इंजरी का मुंबई और दिल्ली की बजाय जयपुर में इलाज कराने के लिए 1936 में खोले सवाई मान सिंह अस्पताल आज राजस्थान ही नहीं भारत के कोने कोने के मरीजों की आशा का सेंटर है।
43 से अधिक वार्डों में 6251 बिस्तरों के साथ 1500 डॉक्टरों और 4000 नर्सों का स्टाफ और 6000 से अधिक बिस्तर वाला एस एम एस अस्पताल राजस्थान का सबसे बड़ा अस्पताल है।
रोजाना 10000 से अधिक ओपीडी मरीजों का ईलाज करने वाला अस्पताल दुनिया में नामचीन है। आउट डोर में सबसे ज्यादा मरीज के लिए 2017-18 में एस एम एस अस्पताल ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया।
सन 2020 में एस एम एस अस्पताल के स्वर्णिम इतिहास में एक और अध्याय जुड़ा जब यहां सड़क हादसों में गंभीर घायलों की जान बचने के लिए ट्रोमा सेंटर में आधुनिक गहन चिकित्सा इकाई यानी आईसीयू तैयार कराने की घोषणा हुई।
ट्रोमा सेंटर की तीसरी मंजिल पर बनने वाले इस विश्वस्तरीय आइसीयू के लिए परिवहन विभाग की सडक़ सुरक्षा विंग ने अस्पताल को 9 करोड़ 80 लाख रुपए आवंटित किए। अभी को आशा जगी कि अब ट्रोमा सेंटर में आइसीयू की समस्या से छुटकारा मिल सकेगा।
यही नहीं, ट्रोमा सेंटर के ग्राउंड फ्लोर पर 4 करोड़ 89 लाख रुपए की लागत से स्किल लैब तैयार हुआ जिसमें डॉक्टर, नर्स, छात्रों और ढाबे वालों को प्रशिक्षण दिया गया। इनको प्रशिक्षित किया जाने लगा कि यदि इनके सामने दुर्घटना हो जाती है, तो किस तरह से अस्पताल लाएं और अस्पताल लाने के बाद कैसे उपचार किया जाएगा।
इसी विश्वविख्यात एस एम एस अस्पताल के लिए 5 अक्तूबर 2025 की रात चुनौतियों की रात थी। 5 अक्टूबर 2025 को रात करीब 11:20 बजे न्यूरोसर्जरी ट्रोमा सेंटर इंटेंसिव केयर यूनिट में लगी आग ने मरीजों और परिजनों के विश्वास को डगमगा दिया। आग की घटना से अस्पताल में अपनी जिंदगी की आस लिए भर्ती आठ मरीजों की जिंदगी की डोर टूट गई। भर्ती कई पीड़ित कोमा में थे या जीवन रक्षक प्रणाली पर निर्भर थे। रिश्तेदारों का आरोप था कि आग से धुआँ फैलते ही अस्पताल के कर्मचारी वार्ड छोड़कर चले गए और तीमारदारों को मरीजों के साथ छोड़ गए।
राजस्थान सरकार ने आग के कारणों की जांच के लिए जांच समिति बनाई है। चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने वादा किया है कि समिति 7 दिन में रिपोर्ट दे देगी।
इसी बीच शाइनिंग टाइम्स न्यूज मीडिया ने दुर्घटना स्थल का डिजास्टर मैनेजमेंट विशेषज्ञ ए के सिंह और उनके सहयोगी इंद्रजीत सिंह मनोहर के साथ दौरा कर सेफ्टी ऑडिट किया।
शाइनिंग टाइम्स न्यूज मीडिया ने खोजा कि मात्र 6 साल पहले बने एस एम एस अस्पताल का ट्रोमा सेंटर आई सी यू यूनिट कैसे सुरक्षा के मामले में धराशाई हो गया।