जातिवाद को पोषण करने के विवाद से घिरा यूजीसी नियम, दलित दूल्हों को घोड़ी से उतारने की घटनाओं के बीच यह दृश्य राजस्थान में क्षत्रिय संस्कृति के असली स्वरूप को उजागर करती है जिसमें क्षत्रिय हर जाति के व्यक्ति के साथ सम्मान का व्यवहार करता है। अवसर था राजस्थान के जाने माने क्षत्रिय भामाशाह भंवर सिंह पलाड़ा के पगड़ी दस्तूर का।
अपने पिताजी पीरू सिंह के देहावसान के बाद पगड़ी दस्तूर के अवसर पर भंवर सिंह पलाड़ा ने गांव के बाल्मीकि समाज के परिवारों को उनके निवास पर जाकर आमंत्रित किया। बैंड बाजे के साथ, कार्पेट बिछाकर ससम्मान बाल्मिकी लोगों को भंवर सिंह अपने निवास पर लाए और अपने साथ भोजन कराया। भोजन के बाद उन्हें सोने की झाड़ू, चांदी की तगारी, बहन बेटियों के लिए चांदी की पायजेब भेंट कर पलाड़ा परिवार ने बाल्मीकि समाज का बहुमान किया।
क्षत्रिय समाज में अपना अलग वजूद रखने वाले भंवर सिंह पलाड़ा ने कहा कि यह घटना सामाजिक समानता, आपसी सम्मान के साथ छुआछूत जैसी कुरीतियों के उन्मूलन का संदेश देती है। गौरतलब है कि राजस्थान के एक और क्षत्रिय भामाशाह मेघराज सिंह भी कई बार यह कह चुके है कि दूसरी जातियों के साथ के बगैर क्षत्रिय अधूरा है इसलिए उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।