फिर हुआ आरक्षण व्यवस्था में संशोधन का जतन। एडवोकेट रीना सिंह और एडवोकेट अश्विनी कुमार ने दायर की याचिका। न्यायालय ने सरकार से मांगा जवाब। भाजपा रक्षात्मक स्टेंड पर।
भारतीय लोकतंत्र और संविधान में आरक्षण दुनिया में अनोखा प्रयोग है जिसके जरिए सामाजिक और आर्थिक भेद को दूर करने के अनवरत जतन किए गए। लेकिन लोकतंत्र के 77 साल और संविधान के 75 साल बाद भी देश में सामाजिक और आर्थिक विभेदन की स्थिति में संतोषजनक सुधार नजर नहीं आता। कई बार तो यह विभेदन और ज्यादा विकृत अवस्था में दृष्टिगोचर होता है।
इन्हीं के बीच सर्वोच्च न्यायालय में एडवोकेट रीना सिंह और एडवोकेट अश्विनी कुमार ने अलग अलग याचिकाएं दायर कर आरक्षण व्यवस्था में संशोधन की गुहार लगाई है। याचिका को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एससी और एसटी आरक्षण से क्रीमी लेयर हटाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया है। याचिका में एडवोकेट अश्विनी कुमार ने मांग की है कि क्रीमी लेयर को एससी-एसटी आरक्षण का लाभ नहीं मिले। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों से चार हफ्ते में जवाब-तलब किया है।
उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट के सामने तर्क दिया कि जिन मामलों में एससी और एसटी परिवार का कोई सदस्य पहले से ही संवैधानिक या बड़े सरकारी पद पर है, ऐसे शख्स के बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि एससी- एसटी वर्ग के भीतर ऐसे परिवार जो सामाजिक और आर्थिक रूप से आगे बढ़ चुके हैं, उनके आरक्षण को जारी रखने से इसका मकसद फेल हो जाता है।
याचिका में कहा गया है कि आरक्षण की व्यवस्था ऐसे लोगों को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी। जो सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े रहे हैं लेकिन समय के साथ ही एससी- एसटी समुदायों में एक संपन्न और प्रभावशाली वर्ग उभरा है। ऐसे प्रभावशाली परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण का लाभ लेते रहते हैं, जिससे इन समुदायों के सबसे कमजोर लोगों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिल पाता।
सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट रीना एन सिंह ने अपनी याचिका में मांग की है कि आरक्षण का लाभ केवल गरीब और वंचित को मिलना चाहिए, आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति, चाहे वह किसी भी जाति का हो उसे आरक्षण से बाहर रखा जाए। एडवोकेट रीना एन सिंह ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत आरक्षण में संवैधानिक सुधार की मांग की है। इसके अलावा उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 में दिए गए मौलिक अधिकारों का जिक्र करते हुए मांग की है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए।
एडवोकेट रीना एन सिंह का कहना है कि सच्चा सामाजिक न्याय तभी स्थापित होगा जब जन्म नहीं बल्कि अवसर तय करेगा कि कौन कितना आगे बढ़ सकता है, और आरक्षण की सफलता तभी मानी जाएगी जब इसका लाभ वास्तव में जरूरतमंदों और सबसे वंचित लोगों तक पहुँचे।
एससी – एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू कराने की मांग करने वाले एडवोकेट अश्विनी कुमार भाजपा से जुड़े माने जाते है। इसलिए यह ट्रेंड पर है कि भाजपा बैकडोर से आरक्षण खत्म करना चाहती है। परिस्थिति की नजाकत को देखते हुए विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बयान जारी किया कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने आरक्षण को सुरक्षित रखा है।