ताजमहल दुनियाभर में प्रेम का प्रतीक माना जाता है। मुगल बादशाह शाहजहां के ओर से उनकी बेगम मुमताज की याद में बनाया ताजमहल कई बार विवादों में रहा है। विवादों के बीच शाहजहां के 371वें उर्स के अवसर पर 15 से 17 जनवरी तक ताजमहल में करीब 20 फीट नीचे तहखाने में शाहजहां और मुमताज के असली मकबरों के दीदार हो रहे है। जिसे लोग बड़ी उत्सुकता से देख रहे है। यहां उर्स की नमाज भी हुई।
अलबत्ता कई हिन्दू संगठनों का दावा है कि असल में यह एक शिव मंदिर था। कई लोग इसे शिव मन्दिर के रूप में तेजोमहल पुकारते है। 15 से 17 जनवरी ताजमहल में हो रहे शाहजहां के उर्स को ताजमहल में आयोजित नहीं कराने लिए हिंदू महासभा ने प्रदर्शन किया।
हाल ही में मध्यप्रदेश के मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि ताजमहल मूल रूप से मंदिर था और मुगल शासक शाहजहां ने उसे मकबरे में तब्दील कराया। मुमताज को पहले बुरहानपुर में दफनाया गया था, लेकिन बाद में जहां मंदिर का निर्माण हो रहा था, उसी स्थान पर शव को दफन कर ताजमहल का निर्माण कराया गया।
ताजमहल के विवाद में बॉलीवुड की भी एंट्री हुई। परेश रावल अभिनीत द ताज स्टोरी में भी ताजमहल के शिव मन्दिर होने के मुद्दे को भुनाया गया है। अलबत्ता विवादित मुद्दे पर बनी यह फिल्म भी विवादों से घिर गई। 22 रूम्स ऑफ ताजमहल के लेखक रुद्र विक्रम सिंह ने अभिनेता परेश रावल सहित फिल्म निर्माता और निर्देशक को कानूनी नोटिश भेजा है कि फिल्म में उनकी पुस्तक की सामग्री को बिना इजाजत और बिना कोई क्रेडिट दिए उपयोग लिया गया है।