भारत का भाग्यविधाता संविधान को अंगीकार करने का दिवस 26 नवंबर पूरे देश में उत्सव के रूप में मनाया गया। सर्व समाज को साथ लेकर देश में समता, मानवता और एकता को बढ़ाने का प्रयास करने वाला संगठन डॉक्टर अंबेडकर विचार मंच ने जयपुर में संविधान दिवस समारोह का आयोजन किया।
सीकर रोड स्थित डॉक्टर अंबेडकर पार्क में संगठन ने महिलाओं और दलितों की संविधान में स्थिति सहित विभिन्न समसामयिक संवैधानिक विषयों पर चर्चा, राष्ट्रवादी गीत और कविताओं की प्रस्तुतियों के साथ सार्थक रूप से संविधान दिवस का आयोजन किया। संविधान दिवस समारोह की शुरुआत डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को पुष्पांजलि के साथ हुआ। नालंदा फाउंडेशन के अध्यक्ष मदनलाल दुधवाल ने संविधान के निर्माण और संविधान में महिलाओं और दलितों की स्थिति पर व्याख्यान दिया।
शाइनिंग टाइम्स न्यूज मीडिया के संस्थापक भंवर सिंह राणावत ने कहा कि सभी भारतीयों के कर्तव्यों की बात करते है लेकिन उनके अधिकारों की कोई फिक्र नहीं करता। स्थिति इतनी विकट है कि अधिकारों की जानकारी नहीं होने से आम भारतीय पुलिस थाने, अस्पताल, पटवार घर सहित सरकारी कार्यालयों में और जन प्रतिनिधियों के सामने लाचार और याचक की तरह खड़ा नजर आता है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि संवैधानिक अधिकारों के लिए जन जागरूकता फैलाई जाएं। शाइनिंग टाइम्स संपूर्ण स्वाधीनता अनुभूति अभियान के तहत आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने का अभियान चलाएगा।
अधिकार आरक्षण मंच के अध्यक्ष राजाराम मील ने बताया कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण सहित संविधान प्रदत्त अधिकारों को पिछले दरवाजे से सरकारें बाई पास कर रही है।
अम्बेडकर विचार मंच के संरक्षक और शाइनिंग स्टार रामेश्वर लाल सेवार्थी ने कहां कि बनिया हर साल हिसाब लगाता है लेकिन 78 साल बाद भी हम हिसाब नहीं लगा पाएं। संविधान में समानता का अधिकार है लेकिन आज भी 98.5 प्रतिशत अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग भरपेट खाना नहीं खा पा रहे है, 80 प्रतिशत लोग आज भी गरीबी की रेखा से नीचे जी रहे है, यह संविधान की हत्या है। संविधान की वजह से हम में से मंत्री भी बन गए, संतरी भी बन गए, कलेक्टर भी बन गए, एस पी भी बन गए। लेकिन बनने के बाद वो हमसे अलग होकर कैपिटलिस्ट हो गए। समाज से आने वाले लोग समाज की बजाय पार्टी के प्रतिनिधि बन गए।
अम्बेडकर विचार मंच समिति के पूर्व अध्यक्ष सीताराम बैरवा ने कहां कि यह निंदनीय है कि धर्म निरपेक्ष देश के प्रधानमंत्री धर्म विशेष के मंदिर पर ध्वजारोहण करते है। हरियाणा से सामाजिक कार्यकर्ता सुभाष कुंडू ने कहां कि आर एस एस एक आतंकवादी संगठन है। उन्होंने इससे जुड़ी किताबें भी बांटी। संतोष कंवर ने कहां कि संविधान में महिलाओं को समानता का अधिकार है लेकिन वो बिना हिसाब, बिना क्रेडिट के घर में चूल्हा चौका करती है।रितु कुमारी ने बलात्कार की घटनाओं पर अपनी मार्मिक चिंताएं व्यक्त की।
संविधान दिवस पर आयोजित हुए समारोह में डॉक्टर दशरथ हिंगुनिया, शिक्षाविद डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद बुनकर, सामाजिक कार्यकर्ता चांदमल काला, समिति के कोषाध्यक्ष सिमरन सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक मांगी लाल, हरिसिंह काजला, युवा नेता विशाल मुंडोतिया, सामाजिक कार्यकर्ता बी एल भाटी, मेघ भाट समाज चेतना संस्थान के कलाकार शिवदयाल पचार, व्यवसायी जगदीश नारायण रमन, मनीषा शायर सिंह बौद्ध, जिला सचिव मोहर सिंह बड़ेरिया, डॉक्टर प्रमोद जाजोरिया, मदन जाजोरिया, रामचंद्र बुनकर, रामकरण नरनोलिया, गिरधारी लाल उदय, हेमलता, मदनलाल जाटव, रतीराम, यतेंद्र सिंह, नाथी देवी, सरोज बड़ेरिया, सरोज कंवर, पूजा कंवर, हंसराज, रामचंद्र उदय, सुंदर उदय ,नारायण लाल, बद्रीनारायण, रामकुमार सहित कई सुधि भारतीयों ने ज्ञान वर्धक संविधान दिवस समारोह में भागीदारी निभाई।