सवाई मान सिंह अस्पताल के ट्रोमा सेंटर के 6 साल पुराने आई सी यू वार्ड में आग ने 8 जाने लील ली।
आग की जड़ तक सरकार और प्रशासन कब पहुंचेगी यह तो कोई बता नहीं सकता लेकिन धुएं के गुब्बार में अभी तो सभी गोता लगा रहे है।
मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्रियों, विपक्षियों के साथ आपा धापी में चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह ने घटना स्थल के दौरे किए।
चिकित्सा मंत्री ने 7 दिन में घटना के कारणों और भविष्य की सुरक्षा उपायों को तलाशने का वादा किया है। लेकिन भांकरोटा सहित प्रदेश की कई आगजनी की घटनाएं अभी तक कारण और समाधान की यह यात्रा पूरी नहीं कर पायी है, ऐसे में ट्रोमा सेंटर की आगजनी की सटीक जांच पर ज्यादा आशा पालना गैर लाजमी है।
यह स्थिति इसलिए भी है कि विपक्ष सहित मीडिया भी जिम्मेदारों को घेरने की रश्मी भूमिका निभा रही है। और जनता मूक दर्शक बने रहने की मजबूर स्थिति में है।
ट्रोमा सेंटर में फिलहाल स्थिति सामान्य है। पहले की तरह चहल पहल है। लेकिन ताज्जुब है कि आग के कारण अभी भी ट्रोमा सेंटर में जिंदा है।
इन सब परिस्थितियों के बीच शाइनिंग टाइम्स न्यूज मीडिया ने डिजास्टर मैनेजमेंट विशेषज्ञ प्रोफेसर ए के सिंह और उनके साथी इंद्रजीत सिंह मनोहर के साथ ट्रोमा सेंटर की अपनी निरपेक्ष फायर सेफ्टी ऑडिट की।
प्रोफेसर ए के सिंह और इंद्रजीत सिंह के साथ शाइनिंग टाइम्स के अधिकारी यह देख कर चौक गए कि इतनी बड़ी घटना के बाद अभी भी आग के कारण ट्रोमा सेंटर में मौजूद है। ट्रोमा सेंटर के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्रियों, चिकित्सा मंत्री के हाई प्रोफाइल दौरे के बाद भी आगजनी के जिंदा कारण मौजूद होने से साफ है कि सरकार और प्रशासन से ज्यादा उम्मीदें पालना बेमानी है।
शाइनिंग टाइम्स के साथ डिजास्टर मैनेजमेंट विशेषज्ञों की राजस्थान के सबसे अत्याधुनिक ट्रोमा सेंटर की सेफ्टी ऑडिट से यह साबित हो गया कि राजस्थान के कमोबेश सभी अस्पताल लाक्षाग्रह की माफिक संचालित हो रहे है।
आइए देखते है डिजास्टर मैनेजमेंट विशेषज्ञ ए के सिंह और उनके सहयोगी इंद्रजीत सिंह मनोहर के साथ राजस्थान के सबसे बड़े अस्पताल एस एम अस्पताल के अत्याधुनिक होने का दावा करने वाले ट्रोमा सेंटर के लाक्षाग्रही स्थिति की कुछ बानगी।
फायर एक्सटिंगुइशर आगजनी में सबसे बड़ा सेफ्टी हथियार होता है। लेकिन शाइनिंग टाइम्स और डिजास्टर मैनेजमेंट विशेषज्ञों को ताजुब्ब हुआ कि हुआ कि ट्रोमा सेंटर के कई फायर एक्सटिंगुइशर अवधि पार मिले।
यह स्थिति तब और ज्यादा चिंताजनक है कि ट्रोमा सेंटर में इतनी बड़ी घटना के बाद और इतनी हाई प्रोफाइल विजिट के बाद भी अवधि पार फायर एक्सटिंगुइशर ट्रोमा सेंटर की दीवारों पर टंग रहे है।
मसलन इसकी उम्र अगस्त 2024 में पूरी हो गई है लेकिन यह अभी भी ट्रोमा से सेंटर के गंभीर मरीजों की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है। कई एक्सटिंगुइशर पर तो उम्र के स्टीकर ही नदारद मिले।
नियमानुसार 18.4 किलो से कम वजन वाले फायर एक्सटिंगुइशर 5 फिट से ज्यादा ऊंचे नहीं होने चाहिए लेकिन ट्रोमा सेंटर का कोई भी फायर एक्सटिंगुइशर तय मानक की ऊंचाई पर लगा नहीं मिला।
ऐसे में अविशेषज्ञ मरीजनों और उनके परिजनों सहित अप्रशिक्षित सुरक्षा गार्डों से इनके उपयोग की कल्पना ही नहीं की जा सकती।
ट्रोमा सेंटर में लगे फायर एक्सटिंगुइशर के उपयोग के तरीके कई भी देखने को नहीं मिले। उनके स्थापित जगह को चिन्हित करने वाले संकेतक तो ट्रोमा सेंटर में ढूंढने पर भी नहीं मिले। यही नहीं, कुछ एक्सटिंगुइशर तो टंगे कपड़ों से छुपा लिए गए थे।
अत्याधुनिक होने का दावा करने वाले ट्रोमा सेंटर में फायर वाटर स्प्रिंकलर की उम्मीद की जा सकती है लेकिन वो जीवन रक्षक छत के सहारे लगने वाले लाल पाइप तो गायब मिले।
इतना ही नहीं फायर वॉटर लाइन के बॉक्स भी उपयोग लायक नहीं थे। प्रोफेसर ए के सिंह और इंद्रजीत सिंह मनोहर ने शाइनिंग टाइम्स को बताया कि कैसे फायर वॉटर लाइन के बॉक्स को खोलने की ट्रोमा सेंटर में कोई व्यवस्था ही नहीं है, ऐसे में आगजनी की स्थिति में वे केवल मूक दर्शक ही बने रह सकते है।
किसी आपात काल के समय चेतावनी देने वाला साउंड सिस्टम तो ट्रोमा सेंटर में स्थापित है। लेकिन उसका उपयोग करने के लिए बिजली सप्लाई की व्यवस्था करना शायद संचालक भूल गए। ऐसे में यह केवल शो पीस बन कर रह गया।
आगजनी की भयानक दुर्घटना के शिकार हुए ट्रोमा सेंटर का आई सी यू वार्ड के बिलकुल सामने स्थित डॉक्टर मनीष अग्रवाल के ताला लगे चैंबर में लगातार चल रहा पंखा किसी नई आगजनी का कारण बन जाए तो ताज्जुब नहीं होगा।
भारी भीड़ वाले ट्रोमा सेंटर में बिजली के खुले सॉकेट भी आसानी से मुसीबत की जड़ बन सकते है। जहां लोग अपने कागज और प्लास्टिक के पाउच दबा कर रखते है।
इतनी बड़ी भूलों के बीच फायर एग्जिट साइन बोर्ड, लाइट बोर्ड या डोर मार्कर की उम्मीद करना बेमानी होगी। अलबत्ता निर्माण के 8 साल बाद आनन फानन में डोर मार्कर के लिए ट्रोमा सेंटर में टाइल्स उखाड़ने का कार्य प्रगति पर है।
शाइनिंग टाइम्स की एफ आई आर रिपोर्ट के विशेष कार्यक्रम इस आग की जड़ कहा है के अगले एपिसोड में तहकीकात जारी है जिन्दगी की डोर छीनने वाली बेपरवाहियों की।