वैचारिक क्रांति के जरिए क्षत्रियत्व को संवारने का प्रयास कर रहे श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन ने अपना आठवां स्थापना दिवस विचार गोष्ठी के रूप में मनाया। विचार गोष्ठी कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सतोगुणीय जातिय भाव के बिंदु पर रखा गया। इसमें यह विश्लेषक हुआ कि जाति भारतीय समाज की एक सच्चाई है, इसे पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता। लेकिन जातिवाद गलत सोच है, जो समाज को तोड़ती है, इसे खत्म करना जरूरी है।
जाति अपने-आप में बुरी नहीं है, लेकिन जब जाति के नाम पर घमंड, नफरत, भेदभाव और राजनीति होती है तो वही जातिवाद बन जाता है। समाज को जोड़ने के लिए जाति की भावना को सेवा, सहयोग और जिम्मेदारी की दिशा में ले जाना चाहिए। केवल जाति का नाम लेकर संगठन बनाना काफी नहीं है, जब तक उसका लाभ पूरे समाज को न मिले।
अगर जातीय भावना को सही दिशा नहीं दी गई, तो वही भावना समाज को नुकसान भी पहुँचा सकती है। विचार गोष्ठी में संदेश दिया गया कि जाति नहीं, जातिवाद गलत है। सोच बदलनी है, समाज बचाना है। संगठन का उद्देश्य सेवा और राष्ट्रहित होना चाहिए। कार्यक्रम में सभी समाज के लोगों ने जाति बनाम जातिवाद पर अपने सकारात्मक विचार रखे। पूर्व सांसद पुष्प जैन ने बताया कि जाति से समाज का विघटन नहीं होता है जातिवाद से समाज में विकृति होती है।
इस विचार गोष्ठी में त्रिलोक चौधरी, शिवराम जाट, मूल सिंह भाटी, भँवर राव, नवल किशोर रावल, पूर्व उप जिला प्रमुख महेश अवस्थी, राकेश परिहार, लूणसिंह, यशपाल सिंह हेमावास, मुकेश गोस्वामी, अशोक शर्मा, गजेंद्र सिंह मगरतालाब, नरपत सिंह गिरादडा, प्रताप सिंह निम्बली उड़ा, भगवान सिंह निम्बली उड़ा, सुलतान सिंह मानपुरा, तेज सिंह खरिया सोढ़ा, नरेन्द्र सिंह बधाल, पर्वत सिंह भुनास, विक्रम सिंह भीटवाडा, महिपाल सिंह खुनीगुड़ा, मोहब्बत सिंह धींगाना, हीर सिंह लोड़ता, ओम सिंह खरिया सोढ़ा, कुंदन सिंह खेरवा, मनोहर सिंह निम्बली उड़ा, रूपेन्द्र सिंह, जितंद्र सिंह चेडा, शूरवीर सिंह खिन्दरा गाव, नरेन्द्र सिंह पावा, कुलदीप सिंह मगरतालाब, अजय पाल सिंह गुड़ा पृथ्वीराज, दिग्विजय सिंह कोलिवाड़ा आदि उपस्थित रहे।
( न्यूज़ प्रेषक- गोविन्द सिंह राठौड़, रानीखुर्द, पाली)