आठ साल बाद आनंदपाल का मुद्दा फिर निकला बोतल से बाहर। फिल्म निर्माता और निर्देशक अरविंद वाघेला की फिल्म ‘टाइगर ऑफ राजस्थान ‘ ने फिर जिंदा किया आनंदपाल मुद्दा।
फिल्म ‘टाइगर ऑफ राजस्थान’ की रिलीजिंग से एक दिन पहले फिल्म के फाड़े पोस्टर।
पोस्टर फाड़ने की घटना को आनंदपाल मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। अलबत्ता लंबे समय से फिल्म को आनंदपाल से जुड़ी बताने वाले अभिनेता अरविंद वाघेला फिलहाल इसे आनंदपाल से जोड़ने से बच रहे है।
राजस्थान के अपराध जगत, राजनीति और समाज के कॉकटेक से संबंधित आनंदपाल से जुड़े फिल्म ‘टाइगर ऑफ राजस्थान’ के पोस्टर फाड़ने की घटना का विशेष विश्लेषण देखे शाइनिंग टाइम्स के साथ।
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आनंदपाल के सकारात्मक चरित्र पर बनी फिल्म टाइगर ऑफ राजस्थान की जयपुर के जैम सिनेमा में 20 जून को रिलीजिंग से एक दिन पहले ही सिनेमा हॉल में लगे फिल्म के पोस्टर को लोगों ने फाड़ दिए।
शाइनिंग टाइम्स ने जैम सिनेमा में फिल्म टाइगर ऑफ राजस्थान के पोस्टर फाड़ने के बाद एक्सक्लूसिवली सबसे पहले ऑन द स्पॉट कवरेज की।
पुलिस अधिकारी ने शाइनिंग टाइम्स को बताया कि टाइगर ऑफ राजस्थान सेंसर बोर्ड से स्वीकृत फिल्म है ऐसे में किसी को फिल्म के प्रदर्शन में बाधा पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
फिल्म के अभिनेता, निर्माता और निर्देशक अरविंद वाघेला ने राजस्थान पुलिस से अपील की है कि राजस्थानी सिनेमा के लिए समर्पित फिल्म टाइगर ऑफ राजस्थान को रिलीज कराने में पुलिस उनकी मदद करें। लाल कोठी थाना इंचार्ज बन्ना लाल ने अरविंद वाघेला को आश्वस्त किया है कि फिल्म को शांतिपूर्ण रिलीज कराने में वो उनके साथ है। वाघेला ने बन्ना लाल को भी राजस्थानी फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया है। फिलहाल पुलिस फिल्म के पोस्टर फाड़ने वालों की तलाश में जुटी है। आज पास के सीसीटीवी कैमरों को भी पुलिस खंगाल रही है।
अलबत्ता राजनीति और सिनेमा के कॉकटेल का सब्जेक्ट आनंदपाल से राजस्थान में फिर से बवाल उठने की संभावनाएं प्रबल होती जा रही है।
निर्माता और निर्देशक अरविंद वाघेला लंबे समय से दावा कर रहे थे कि यह फिल्म आनंदपाल के अच्छे पहलू का बखूबी प्रदर्शन करेगी। लेकिन अब वे बैकफुट पर आते नजर आ रहे है। सूत्रों के अनुसार फिल्म में करेक्टर का नाम भी आनंदपाल से बदल कर दूसरा कर दिया है।
फिल्म में आनंदपाल के दौर की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और आनंदपाल मामले से जुड़े भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ से जुड़े सींस भी फिल्माएं गए थे लेकिन आज शाइनिंग टाइम्स की और से वाघेला को इस बारे में पुछे सवाल का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
ऐसा माना जा रहा है के फिल्म निर्माता गैंगस्टर पर बनी इस फिल्म को प्रदर्शित करने में बड़े दबाव में है।
गौरतलब है कि आनंदपाल के जीवन की तरह ही फ़िल्म टाइगर ऑफ राजस्थान की मेकिंग और रिलीजिंग की यात्रा कांटों भरी है। अरविंद वाघेला ने बताया कि फिल्म के निर्माण के पहले दौर में ही लोगों के धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए थे। धमकियों से डर कर निर्माता और फाइनेंसर भी पीछे हट गए थे। तब अरविंद वाघेला ने अपने घर को गिरवी रख कर फिल्म का निर्माण करवाया। राजस्थान की राजनीति को प्रभावित करने वाले आनंदपाल बनी फिल्म को सेंसर बोर्ड भी पास करने को राज़ी नहीं था। फिर फिल्म की कहानी को पूरी तरह काल्पनिक जामा पहनाकर सिनेमा हॉल तक लाया गया। अब पुलिस की सुरक्षा में फिल्म टाइगर ऑफ राजस्थान को लोगों तक पहुंचाने की कोशिशें की जा रही है। पोस्टर फाड़ने की घटना के बाद एक बार प्रदर्शित करने से पीछे हट रहे जैम सिनेमा हॉल के संचालक भी पुलिस का साथ मिलने के बाद फिर से हिम्मत जुटा रहे है लेकिन आठ साल से बोतल में बंद आनंदपाल के मुद्दे को फिल्म निर्माता अरविंद वाघेला ने फिर से बाहर निकाल कर राजस्थान के अपराध जगत, राजनीति और समाज विशेषकर राजपूत समाज में बवंडर लाने की भूमिका तैयार कर दी है। —– फिल्म के बहाने राजस्थान की राजनीति में फिर हो सकता है बवाल
गौरतलब है कि 24 जुलाई 2017 को गैंगस्टर आनंद पाल के पुलिस एनकाउंटर के बाद राजस्थान की राजनीति में बड़ा बवाल आ गया था। प्रदेश के क्षत्रिय समाज सहित विपक्षी कांग्रेस ने एनकाउंटर को फर्जी बताकर तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर आनंदपाल के एनकाउंटर की जांच सीबीआई से कराने का दबाव बनाया था। माना जाता है कि एनकाउंट से प्रदेश के क्षत्रिय समाज में फैले वसुंधरा राजे के खिलाफ फैले असंतोष ने तब के विधानसभा चुनाव में राजे सरकार को हारने में बड़ी भूमिका निभाईं थी। कल भी कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आनंदपाल घटना से जुड़ी फिल्म ‘टाइगर ऑफ राजस्थान ‘ का पोस्टर रिलीज कर संकेत दे दिया कि फिल्म के बहाने विपक्षी कांग्रेस निवर्तमान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित वर्तमान भजन लाल सरकार को फिर से एनकाउंटर मामले में घेरने की तैयारी कर रही है।